"स्वप्न से सफलता तक"

स्टेज पर एक छोटी कक्षा दिखाई देती है। बच्चे अपनी-अपनी मेज्ज बैठे होते हैं। एक बोर्ड दीवार पर लिखा हुआ होता है: "सपने दिखाना मत, सबकुछ हासिल करके दिखाना।")

अध्यापक (स्टेज पर चलते हुए।): बच्चो, याद रखो, कामयाबी के लिए हमें सबसे अच्छा करना होगा।

राम (अपनी मेज पर दांत चबा कर): मैं बड़ा होकर क्या बनूंगा? सब कुछ हासिल करके दिखाना है।

श्याम (हंसते हुए): चिंता मत करो, राम। हम सब कामयाब होंगे।

(संगीत की ध्वनि सुनाई पड़ती है, और एक चमकदार मेघ दिखता है)

चमकदार मेघ (मुस्करा कर): नमस्कार, बच्चों! मैं चमकदार मेघ हूं। मैं यहां हूं बताने के लिए कि तुम्हें सपने दिखाने से क्या अच्छा होगा।

अध्यापक: नमस्कार, चमकदार मेघ। कृपया हमें बताएं।

चमकदार मेघ: कामयाबी के लिए, सपने देखकर ही सही दिशा मिलती है। यदि तुम्हें सपने दिखाने से डर लगता है तो तुम सही दिशा नहीं ले सकते।

राम: लेकिन हमें सब कुछ हासिल करके दिखाना है!

चमकदार मेघ: सही कहा, राम। लेकिन सपने देखने के बिना, सफलता कैसे मिलेगी? सफलता का रास्ता सपनों से होता है।

अध्यापक (खुशी से): चमकदार मेघ, आपकी बात सही है। हमें सपने देखना चाहिए ताउम्र संघर्ष कर सकें।

(चमकदार मेघ की ध्वनि का अंत होता है, और संगीत कैसी धुंधली होती है)

राम: मैं अब समझा। सपने देखकर ही हमें नई दिशा मिलेगी।

अध्यापक: बिलकुल, राम। और याद रखो, सपने देखो, मेहनत करो, और सफलता हासिल करो!

(सभी बच्चे एक साथ हंसते हुए उठ जाते हैं, स्टेज पर से बाहर)

नाटक समाप्त।

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