पैसे की चाह
पैसे की चाह में, मनुष्य दौड़ता है भागता है,
इस भाग-दौड़ में, वह जीवन को भूल जाता है।
पैसे के पीछे, सब कुछ छोड़ देता है इंसान, जिंदगी का मजा, दौलत में नहीं होता जहां।
पैसे का वादा, सब कुछ समझो लुभाव का, यह वादा नहीं रखता, जीवन का कोई बचाव का।
पैसों के लिए, कभी किसी से न करो दुश्मनी, जिंदगी का जीना, है प्यार और दोस्ती की कहानी।
पैसों के लिए, अपनों से न करो बैर, जिंदगी अच्छी बिताने की हो जो इच्छा तुम्हारी।
पैसों की दौलत में, नहीं मिलता सुख और समृद्धि, बस अपनों के साथ होने से मिलता है सच्ची खुशियों की सिद्धि।
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