धर्म

 जीवन का ध्येय है धर्म,

इससे बढ़कर कोई नहीं कर्म।

धर्म की रक्षा के लिए हम, करते निरंतर प्रयास जब-जब।

सत्य और न्याय का पालन करें, अधर्म से दूर हमेशा रहें।

अहिंसा के तत्वों पर चलें, शांति और सद्भाव की ओर जाएँ।

प्रण लें धर्म के उच्च सिद्धांतों को, उनसे हम जीवन में प्रेरणा लें जो।

धर्म की शक्ति से जग को जागृत करें, ज्ञान की रोशनी से सब कुछ समझें।

धर्म के रुख हमेशा उन्नति की ओर हों, यही हमारा सबसे बड़ा धर्म हों।

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