दृष्टि
जब सपनों से भी ऊंची दृष्टि हो,
तब सफलता की राह आसान हो।
जीत का जश्न मिले या हार का गम, दृष्टि से उसे ना देखें तब हम।
धीरज से दृष्टि को चलाएं हमेशा, उठते रहें हम जब भी कठिनाई का सामना।
संघर्ष से ना घबराएं और डरें, धीरज और दृष्टि को हम हमेशा बढ़ाएं।
दृष्टि हमारी धीरज हमारा, इसी से हम आगे बढ़ते हैं सदा।
चलते रहें हम ये राह पर अपनी, धीरज और दृष्टि से हमेशा भरपूर हों हम निरंतर अपनी।
धीरज से हम ध्यान लगाएं हमेशा, धैर्य से सफलता की उम्मीद रखें हम हमेशा।
जब सपनों से भी ऊंची दृष्टि हो, तब सफलता की राह आसान हो।
इसी धीरज और दृष्टि से भरपूर कवच के समान है धीरष्टि, उसे हमेशा धारण करें और सफलता की ओर बढ़ते रहें हम निरंतर।
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